Thursday, August 22, 2013

आचार्य चाणक्य

मेरे राष्ट की अखंडता में जो बाधक होगा उसका में सर्वनाश करूँगा, और स्वयं स्वर्ग  देवता भी मेरा मार्ग नहीं रोक सकते : आचार्य चाणक्य। 

देख किसी का दर्द जब आह निकाल जाती हैं ....बस यही बात इंसान को इंसान बनाती हैं 

आँसू जाता देते हैं दर्द कैसा हैं...
बेरुखी बता देती हैं , हमदर्द कैसा हैं ...
घमंड बता देता हैं , पैसा कितना हैं .....
संस्कार बता देता हैं परिवार काइनसा हैं ....
बोली बता देती हैं इंसान कैसा हैं ....
बहस बता देती हैं ज्ञान कैसा हैं ........
ठोकर बता देती हैं ध्यान कैसा हैं .... 
नजरे बता देती हैं इरादे  कैसे हैं ....
स्पर्श बता देता हैं , नियत कैसी हैं ?
और वक्त बता देता हैं, रिस्ता कैसा हैं .....

No comments:

Post a Comment

Circumstantial Evidence and its Value with prominent case Laws......

  Circumstances sometimes speak as forcefully as does direct evidence What is Circumstantial Evidence:- ‘Circumstantial Evidence’ includ...